ब्रेकिंग न्यूज औरंगाबाद कोर्ट का सख्त रुख-बिना लाइसेंस होने के बावजूद परिवार को मिला न्याय
इस घटना पर ब्रेकिंग न्यूज के जरिए सभी को जानकारी दी जाएगी।
छत्रपती संभाजिनगर शहर में हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना के मामले में औरंगाबाद मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने बड़ा फैसला सुनाया है। नाबालिग छात्रा आफ़िक महरिन की मौत के बाद उसके परिवार को 27 लाख रुपये देने का आदेश कोर्ट ने सुनाया है।
ब्रेकिंग न्यूज: इस मामले ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है।
ब्रेकिंग न्यूज से यह स्पष्ट होता है कि न्याय हमेशा जीतता है।
यह राशि बीमा कंपनी, वाहन मालिक और संचालक को संयुक्त रूप से चुकानी होगी। यह मामला काफी गमभीर बताया जा रहा है। दुर्घटना में जान गवाने वाली छात्रा के माता-पिता ने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और कोर्ट ने पूरी तरह से उनकी आर्जी को कुबूल किया और उन्हे न्याय दिलाया ।।
हादसा कैसे हुआ??
इस ब्रेकिंग न्यूज के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा।
इस ब्रेकिंग न्यूज ने हर किसी का ध्यान आकर्षित किया।
यह एक ब्रेकिंग न्यूज है जो न्याय की जीत को दर्शाती है।
दोपहर को आफक महरिन अपनी स्कूटी से आरिफ़ कॉलोनी से भड़कल गेट की और जा रही थी।। उसी समय जामा मस्जिद की तरफ से आ रही एक कार ने पीछे से महरिन की स्कूटी को जोर से टक्कर मार दी।
टक्कर की आवाज इतनी जोर की थी के आसपास के लोग भागने लगे, कार ने सामने से नहीं बल्कि पीछे से टक्कर मारी जिसकी वजह से स्कूटी पूरी तरह से टूट गई और महरिन काफी दूर जाकर गिर पड़ी, जिसकी वजह से उसके सर पर गहरी चोट लागि और बे तहाशा खून रोड पर बहने लगा, लोगों ने तुरंत महरिन को पास के अस्पताल में शरीक किया लेकिन कुछ ही टाइम के बाद महरिन ने दम तोड़ दिया।
समाज में इस ब्रेकिंग न्यूज का व्यापक असर पड़ेगा।
कोर्ट में क्या हुआ ??
मामले की सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने यह तर्क दिया की लड़की नाबालिग थी और उसके पास ड्राइविंग लैसङ्के नहीं था, इसलिए मुआवजा नहीं दिया जाना चाहिए।
कोर्ट ने सारी बात सुनी और अपना फैसला सुनाते हुए कहा की बीमा कंपनी की इस दलील को खारिज किया जाता है और महरिन के माता-पिता को न्याय दिलाया
कोर्ट ने साफ कहा की दुर्घटना कार चालक की लापरवाही से हुई थी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया की लाइसेंस न होने के आधार पर पीड़ित को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
इसी आधार पर कोर्ट ने पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 27 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
